खेलो के चितेरे

अगस्त 6, 2008

चित्रकार के बारे में कहा जाता है कि उसका कैनवास का दायरा बहुत विस्तृत होता है और  उस कैनवास पर समाज का प्रतिबिम्ब देखा जा सकता है। कलाकार समाज के प्रति संवेदनशील होता है और वह जो कुछ महसूस करता है उसे कैनवास पर उतार देता है। लेकिन आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि खेल भी एक कलाकार का विषय हो सकता है। खेलो पर चित्र की बाते यदा कदा सुनने का मिलती है । परन्तु खेलो पर चित्रकारी करने वाला एक अलग कलाकार वर्ग है और उनकील कलाकृतियों की दुनिया में बहुत बड़ी मांग है। वर्तमान समय में खेलो पर बनी कलाकृतियों का एक बहुत बड़ा बाजार है और दुनिया के अलग अलग कोने में कलाकार खेलो के रोमांच को कैनवास पर उतारने का कार्य बखूबी कर रहे है।

 खेलो के एक्’ान को कैनवास पर उतारने वाले कलाकार वैसे तो पूरी दुनिया में फेले हुए है परन्तु अमेरीका इसका केन्द्र है । यहां पर कई कलाकार खेलो पर चित्रकारी करने में वि’ोषज्ञता हासिल किए हुए है। खेलो पर चित्रकारी करने वाले कलाकारो को एक मंच प्रदान करने के लिए 1984 में अमेरीका में अमेरीकन स्पोर्टस आर्ट म्यूजियम एवं आर्चिव ( एएसएएमएं) की स्थापना की गई। यहां खेलो पर बनी कलाकृतियांे का संरक्षण किया जाता है । इसके मुख्यालय में एक आर्ट गैलेरी भी है जिसमें खेलो पर चित्रकारी करने वाले प्रसिद्ध चित्रकारो की कलाकृतियां प्रदर्’िात है। इस संस्था द्वारा प्रतिवर्ष साल के सर्वश्रेष्ठ खेल कलाकार को सम्मानित किया जाता है। 1984 से लगातार यह पुरस्कार दिया जा रहा है।  चीन के चित्रकार गु गान को 2008 का सर्वश्रेष्ठ खेल चित्रकार घोषित किया गया है।  गु गान खेलो पर परम्परागत और समकालीन चित्रकारी करते है। इस पुरस्कार के लिए दुनिया का कोई भी कलाकार जो खेलो पर कलाकृतियां बनाता है, आवेदन कर सकता है। यह पुरस्कार अब तक दुनिया के 24 कलाकारो को दिया जा चुका है।

 अमेरीका के एडगर ब्राउन दुनिया के वि’ोषज्ञ खेल चित्रकार है। ब्राउन केवल खेलो को ही कैनवास पर उतारते है। एथलीटो की अलंकारिक कलाकृतियों को कलाप्रेमियो द्वारा वि’ोष रूप से पसंद किया जाता है। बा्रउन स्वंय मार्’ाल आर्ट और कु’ती के खिलाड़ी रह चुके है। ब्राउन एथेलेटिक्स और रग्बी जैसे खेलो को कैनवास पर बखूबी उतारते है। ब्राउन की चर्चित कृतियों में कु’ती की ‘ द कार्डले ’ प्रसिद्ध मुक्केबाज मो. अली पर ‘द ग्रेटेस्ट’ और फुटबाल पर ‘सुपर बाउल’ प्रमुखस हे। इन कृतियों की कीमत 10,000 अमेरीकी डाॅलर से शुरू होती है। ब्राउन की तरह ही  मार्क ट्रब्सूकी भी एथलीटो के एक्’ान को कैनवास पर उतारते है।  मार्क की पेटिंग्स बहुत मंहगे दामो में बिकती है और इनके जरिये कमाइ्र्र गई रा’िा का एक बहुत बड़ा हिस्सा चैरिटी में लगाते है। फं्रास के चित्रकार पास्कल जीन डेलोरम को खेलो से बहुत लगाव है। वे मैदान में खेलते नहीं है परन्तु वे अपनी भावनाओ को कैनवास पर उतारते है। वे अपनी खेल कलाकृतियो की कई प्रदर्’िाया लगा चुके है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘विक्टोयर’,:विन्डसर्फ क्लोवर और ‘सैलिंग एण्ड मोय ’ है। इनकी कृतियो की कीमत 350 यूरो से 10,000 यूरो तक हे। फा्रंस में उनकी खेल कलाकृतियो की जबरदस्त मांग है।

 खेल जीवन में उर्जा भरते है और बेहतरीन खेल कृतियां मन को उर्जावान बनाती है। इसी कारण यूरोप और अमेरीकी दे’ाो में खेलो पर बनी कलाकृतियांे का पसंद किया जाता है। खेलो पर चित्रकारी करने वाले मिकी मेन्टले की बेसबाल पर बनाई गई एक कृति एक लाख दस हजार पौण्ड में निलाम हुई। खेल कृतियो में मुख्य पर से खिलाड़ियों के पोट्रेेट, एथलीटो के एक्’ान और समकालीन कृतियां पसंद की जाती है। कलाकार मुख्य रूप से एथलेटिक्स, रग्बी, गोल्फ और फुटबाल पर कृतियां बनाते है। ईग्लैण्ड के कुछ कलाकारो ने क्रिकेट पर भी कृतियां बनाई है। इग्लैण्ड के चित्रकार जाॅन हाॅकिन्स ने क्रिकेट पर एक सीरीज कैनवास पर उतारी है।  उनकी कृति ‘क्रिकेट सीन’ काफी चर्चित रही
 भारतीय चित्रकला में भी खेलो पर चित्रकारी के उदाहरण मिलते है परन्तु भारत में यह एक अलग वर्ग के रूप  में विकसित नहीं हुई है। जयपुर के युवा चित्रकार संजय वर्मा और बीकानेर के योगेन्द्र कुमार पुरोहित ने भी खेलो को कैनवास पर उतारने का प्रयास किया है। इसप्रकार एक चित्रकार की दृष्टि खेल मैदान तक भी पहुंचती है और वह अपनी कूंची से खेल के रोमांच को अमर कर देता है।


ओलम्पिक में फलेगा फूलेगा सैक्स उद्योग ?

जुलाई 24, 2008

बड़े खेल आयोजनो में वे’यावृत्ति की खबरे आती रहती है और कई स्थानो पर इसे अधिकारिक रूप से मान्यता भी दी जाती है। वे’यावृत्ति की परिभाषा और समाज में मान्यता अलग अलग है। इस संबध में ए’िाया और यूरोप के दे’ाो की स्थितियां भिन्न भिन्न है। इस कारण बड़े खेल आयोजनों में वे’यावृत्ति की खबरे भी अलग अलग प्रकार से आती है। बीजींग में होने वाले ओलम्पिक खेलो के मध्यनजर वे’यावृत्ति और सैक्स वर्करो को लेकर चर्चाए बढ़ गई है।

चीन में वे’यावृत्ति के बारे में अलग अलग धारणाऐ है परन्तु कानूनी रूप से वहां सैक्स वर्करो को आजादी नहीं है और समाज में उन्हे घृणित नजरो से देखा जा सकता है। इस कारण बीजग ओलम्पिक में वे’यावृति को रोकने के लिए चीन सरकार ने दि’ाा निर्दे’ा जारी किये है। इसके अलावा बीजींग पुलिस ने भी कड़ी कार्यवाही करते हुए सैक्स वर्करो को शहर से हटा दिया है। एड्स और कण्डोम का जोरदार प्रचार किया गया है। चीन केे सार्वजनिक सुरक्षा विभाग की वेबसाईट पर मनोरंज केन्द्रो के लिए दि’ाा निर्दे’ा भी जारी किए गये है जिसमें नाईट क्लब भी शामिल है। इसमें महत्वपूर्ण निर्दे’ा है कि मनोजरंज केन्द्रो की खिड़किया पारदर्’ाी हो। इससे साफ जाहिर है कि वे’यावृत्ति रोकने के लिए कड़ी कार्यवाही की जा रही है। परन्तु विदे’ा से आने वाले सैक्स वर्करो के लिए भी कड़ वीजा नियम बनाये गये है। रूस और जर्मनी की कई सैक्स वर्करो की एजेन्सिया बीजींग ओलम्पिक में व्यापार के लिए लाईसेंस हासिल करना चाहती है परन्तु चीनी अधिकारियांे का रूख इस संबध में कड़ा है। विदे’िायों के लिए चीनी सरकार ने खास नियम औा प्रतिबंध घोषित किए है।

फुटबाल के आयोजनो में खासकर यूरोपियन दे’ाो में सैक्स व्यापार की अनुमति दी जाती है। इसके लिए जर्मनी, रूस और ब्रिटेन की कई एजेन्सिया इसके लिए आवेदन करती है। पिछले वि’यकप फुटबाल मे वे’यावृत्ति को मान्यता देने के कारण इस आयोजन मे ंसैक्स बड़ा व्यापार बन कर उभरा। एक अनुमान के अनुसार इस वि’वकप फुटबाल में 400,000 से 700,000 सैक्स वर्करो ने काम किया और सम्बन्धित एजेन्सिायो करोड़रो डाॅलरर्स का मुनाफा कमाया। वा’िांटन पोस्ट में प्रका’िात एक आलेख के अनुसार रूस और जर्मनी के कई सेक्स वर्कर इस समय में चीन में व्यापार कर रहे है। चीन अखबारो की रिपोर्टो के अनुसार विदे’ाी सेक्स वर्कर ग्राहको से ऊंचे दाम वसूल कर रह  है और ओलम्पिक के दौरान प्रतिबंध के बावजूद इनका व्यापार कई गंुना बढ़ने संभावना है। बीजींग के एक प्रसिद्ध पत्रकार के अनुसार ओलिम्पक के दौरान सैक्स एक उद्योग बन जायेगा।

 सैक्स वर्करो के काम करने , वे’यावृत्ति और एजेन्सियो द्वारा पैसा कमाने की खबरे आती रहती है। लेकिन इस प्रकार के बड़े खेल आयोजनो के दौरान सैक्स वर्करो के शोषण की खबरे भी सामने आई है। ब्रिटेन में महिलाओ के न्याय के लिए संस्था चलाने वाले  जुली बिन्डेल वहा के अखबार  गार्जियन में लिखते है कि ब्रिटेन की एक 17 वर्षीय सैक्स वर्कर ने उन्हे अपने शोषण की कहानी बतायी । 17 वर्षीय एल्उा को उसके नियोजक ने वि’वकप फुटबाल के दौरान काम के लिए भेजा । वहां उन्हे 17 ’िा्फ्ट में लगातार काम करना पड़ता था। इसके अलावा ज्यादा पैसे के लिए ग्रुप सैक्स के लिए भी मुझे काम करना पड़ा। बिन्डंेल के अनुसार इस प्रकार कई सैक्स वर्कर्स शोषण की ’िाकार है और इस प्रकार के खेल आयोजनो के माध्यम से सेक्स वर्कर एजेन्सिया इन वर्कर्स का शोषण कर करोड़ो के वारे न्यारे करती है। परन्तु अभी तक इस शोषण के विरूद्ध किसी ने आवाज नहीं उठाई है।

 जहां एक ओर सैक्स वर्करो के शोषण और समाज में नैतिकता की बात की जाती है वहीं एक संस्था ऐसी भी है जो इनके लिए कार्य करती है। भारतीय समुदाय कल्याण संस्था सैक्स वर्करो के लिए खेलो का आयोजन करता है। इस अप्रवासी संस्था ने  2005 में सैक्स वर्करो के लिए क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता मे सैक्स वर्करो को ही खेलने की छुट थी।

 इन सब के बावजदू यह तय है कि यूरोपियन खेल प्रेमियो और खिलाड़ियों ने खेल आयोजनो में वे’यावृत्ति को बढ़ावा देते है जबकि खेल की भावना इसके विपरित होती है । ऐसा लगता है कि यूरोपियन खेलो की आड़ में अपनी सैक्स आंकाक्षओ की पूति करते है। इस सबंध में चीन के अधिकारियों द्वारा अपनाया गया कड़ा रूख बिलकुल सही है और इस संबध में उन्हे पुख्ता निगरानी करनी होगी ताकि प्रतिबंध के बावजूद सैक्स उद्योग के रूप में नहीं बदल जाये।
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सुरेश रैना की लेट नाईट पार्टी

जुलाई 14, 2008

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज आसिफ को आईपीएल के दौरान न’ाीली दवाओ के सेवन का दोषी पाया गया। आईपीएल के दौरान उनका लिया गया डोपिंग टेस्ट पोजिटिव पाया गया है। जिस समय यह खबर आई ठीक उसी समय इस खबर की पुष्टि हुई कि ए’िायाकप फाईपन से पूर्व तीन भारतीय क्रिकेटर कराची में देर रात तक एक पार्टी में मस्ती कर रहे थे। समाचार पत्रो में छपी तस्वीरे भारतीय क्रिकेटरो की कारगुजारियों का बखान कर रही है। दो द’ाक पहले तक ऐसी खबरे इ्रग्लैण्ड, आस्टेंलिया और वेस्टइंडीज के क्रिकेटरो के बारे में छपती थी। परन्तु पिछले एक द’ाक से जिस प्रकार भारतीय उपमहाद्वीप के खिलाड़ियों के खेल चरित्र. हनन की घटनाऐं सामने आ रही है।, जो चिंता का विषय है। इस एक द’ाक में मैच फिक्सिंग से लेकर डोपिंग टेस्ट तक की घटनओं में इस उपमहाद्वीप के खिलाड़ी शामिल रहे है। भारतीय उपमहाद्वीप के क्रिकेटरो के इस व्यवहार से क्रिकेट नहीं इस महाद्वीप का पूरा खेल जगत बदनाम हो रहा है। खिलाड़ियों का अनियंत्रित होता यह व्यवहार चिंता का विषय होना चाहिए।

 एक समय था इयाॅन बाॅथम और विव रिचर्डस द्वारा शराब पीकर काउंटी क्रिकेट मैच खेलने की खबरे आती थी। इन खबरो पर क्रिकेट जगत में ज्यादा बवाल नहीं मचता था क्योंकि ऐसे क्रिकेटरो के खेल चरित्र के बारे में काई अच्छी राय नहीं थी। भारतीय उपमहाद्वीप में खासकर भारत के खिलाड़ियों को सभ्य खेल के सभ्य खिलाड़ी माना जाता था। भारतीय खिलाड़ी क्रिकेट के अनु’ाासित खिलाड़ी माने जाते थै। परन्तु पिछले एक द’ाक से घट रही घटनाओ ने भारतीय उपहाद्वीप के खिलाड़ियों की छवि को बुरी तरह प्रभावित किया है। पाकिस्तान के खिलाड़ियों की छवि तो शुरू से ही खराब रही है फिर भी वे खेल के प्रति समर्पित देखे गये है। लकिन पिछले एक द’ाक से पाकिस्तान खिलाड़ी न’ाीली दवाओ के सेवन और अपने आपराधिक चरित्र के कारण भी सूर्खियों मंे रहे है। सबसे हैरानी की बात यह है कि भारतीय खिलाड़ी भी इस जमात में शामिल हो गये है। मैच फिक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों के शामिल होने की पुष्टि के बाद अन्य कारणो से भी भारतीय क्रिकेटर सूखिर्या में रहे है। देर रात तक पार्टियों में जाना, मैदान में छींटाकर्’ाी करना और हाल ही में हरभजनसिंह द्वारा थप्पड़ मारने के प्रकरण ने इस महाद्वीप के क्रिकेटरो की छवि को घूमिल किया है। हाल ही में ए’िाया कप के फाईनल से पूर्व देर रात तक एक पार्टी में सुरेना रेना की  लड़कियो  के साथ तस्वीरो ने भारतीय क्रिकेट को शर्मसार किया है।

 ऐसा क्या कारण है कि इस महाद्वीप के खिलाड़ियों का लगातार चरित्र हनन हो रहा है। पिछले एक द’ाक से भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट का बूम आया है। श्रीलंका द्वारा वि’वचैम्पिय बनने के बाद इस क्षेत्र की क्रिकेट ने यूरोप , दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज द्वीप समूह की क्रिकेट से बढ़त ले ली है। इस कारण यहा ं क्रिकेट में पैसा भी बहुत आया है। दूसरे महाद्वीपो के खिलाड़ी भी इस क्षेत्र की क्रिकेट की ओर आकर्षित हुए है। क्रिकेट में बढ़ते ग्लेमर और पैसे ने क्रिकेटरो को सितारा छवि दे दी है और वे अपने आपको सितारा से कम नहीं समझते है। इस सितारा होने के अहसास ने ही उनके व्यवहार को अनियंत्रत कर दिया है। इसके अलावा इसका सबसे बड़ा कारण भारत और पाकिस्तान में अनुभवी खिलाड़ियों की उपेक्षा है। अनुभवी खिलाड़ियों की उपेक्षा से युवा खिलाड़ी अपने आपको फ्री हैण्ड अनुभव करते है। टीम में सीनीयर खिलाड़ियों की उपस्थिति से न केवल  अनु’ाासन रहता है बल्कि युवा खिलाड़ियों को काफी कुछ सीखने को मिलता है। सीनीयर खिलाड़ियों के टीम में होने से युवा खिलाड़ियों को न केवल खेल सुधारने में मदद मिलती है बल्कि अन्य मैनर्स सीखने में भी मदद मिलती है। खेल के अलावा भी अन्य मैनर्स भी खिलाड़ियां को पालन करने हेाते है। ये मैनर्स सीनीयर खिलाड़ियों को देखकर ही सीखे जा सकते है। वर्तमान में सीनीयर खिलाड़ियों के नाम पर भारत और पाकिस्तान दोनो टीमो में शून्यता है।

 भारत और पाकिस्तान के क्रिकैट बोर्डस को इस सबघ में कठोर रवैया अपनाना चाहिए। किसी प्रतियोगिता और दौरो के समय खिलाड़ियों के लिए आचार संहिता बनाई जानी चाहिए। अब समय है कि इस महाद्वीप में खिलाड़ियों की धूमिल होती छवि पर गौर किया जाना चाहिए और समय रहते आव’यक कदम उठा लेने चाहिए अन्यथा कई प्रतिभा’ााली खिलाड़ी अपने रास्ते से भटक जायेंगे और समय पूर्व ही उनका खेल जीवन समाप्त हो जायेगा। इस सबंध में बीसीसीआई और पीसीबी को गंभीरता से लेना चाहिए और शीघ्र ही आव’यक कदम उठाये जाने चाहिए।
मनीष कुमार जोशी सीताराम गेट के सामने, बीकानेर


खिलाड़ियों की सुरक्षा चिंताऐं

जुलाई 10, 2008

आस्ट्रेलिया  के क्रिकेटरो ने पाकिस्तान में सितम्बर में आयोजित होने वाली चैम्पियंस ट्राफी में खेलने से इनकार कर दिया। उन्होन यह कदम हाल ही में पाकिस्तान में आतंकवादीयों द्वारा किये गये बम विस्फोटो के मध्यनजर सुरक्षा कारणो से ‘यह कदम उठाया है। न्यूजीलैण्ड और दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेटर भी सुरक्षा कारणो से ऐसा ही कदम उठाने की सोच रहे है। इस कारण से चेम्पियसं ट्राफी का आयोजन खतरे में पड़ गया है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी दे’ा के खिलाड़ियों ने आतंकवादीयो की हिंसक गतिविधियों के मध्यनजर किसी भी प्रतियोगिता में खेलने से इनकार किया है । इससे पहले भी क्रिकेट व अन्य खेलो के खिलाड़ियों ने सुरक्षा कारणो से हिंसा प्रभावित दे’ाो अथवा शहरो में खेलने से इनकार किया है। इस कारण यह प्र’न खड़ा होना लाजिमी है कि कड़े सुरक्षा उपायो के बावजूद खिलाड़ी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित क्यों होते है ? और मेजबान व खेल संगठन खिलाड़ियों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करने में नाकाम्याब क्यों रहे है ?

 ख्ेालो को शांति और मैत्री का माध्यम माना जाता हे। खिलाड़ी खेलो के द्वारा पूरी दुनिया का शांति और मेत्री का संदे’ा देते है। ओलम्पिक आंदालेन इसका एक उदाहरण है जहां तमाम मतभेदो के बावजूद दुनियाभर के दे’ा खेल के लिए एक ही स्थान पर इकट्ठे होते है। भारत और पाकिस्तान में आतंकी घटनाओ के कारण क्रिकेट संबध टूट गये लेकिन क्रिकेट ही दोनो दे’ाो को नजदीक लाने का माध्यम बना। ऐसे में आतंकी गतिवधियां खेलो के इस संदे’ा को प्रचारित होने में बाधा उत्पन्न करती है।  आतंकी सीधे तौर पर खेलो को नि’ााना बनाकर आंतकी घटनाऐं नहीं कर रहे है । फिर भी ख्ेालेा के माध्यम से विभिन्न दे’ाो के माध्यम से खत्म  हो रही वैमनस्यता को आंतकी पचा नहीं पा रहे है और वे हिंसक घटनओ से कहीं न कहीं खेलो को प्रभावित करने की मं’ाा रखते है। ऐसे में सीधे तोैर पर सवाल उठता है कि मेजबान दे’ा और आयोजक संगठन खेलो के आयोजन के सबंध में अन्य तैयारियो के अलावा सुरक्षा उपायो पर कितने गंभीर होते है ? खेल सं्रगठन आयोजक दे’ा अथवा शहर की घोषणा करते है । मेजबान इसकी तैयारियां शुरू कर देते है । लेकिन जब खिलाड़ी सुरक्षा कारणो से खेलने से इनकार करते है तो खेल संगठन सुरक्षा के मुद्दंे को गंभीरता से लेते है जबकि आयोजन की घोषणा करते समय ही सुरक्षा मुद्दो को गंभीरता से लेना चाहिए। इसके लिए सुरक्षा मानदण्ड तय किये जाने चाहिए। आयोजक दे’ा द्वारा सुरक्षा उपाय करने के बावजूद भी  खिलाड़ी अपने आपको असुरक्षित महसूस करते है और हिंसा प्रभावित इलाको में खेलने से इनकार कर देते है।

 खेलो के माध्यम से शांति का संदे’ा दिया जाता है लेकिन जान को जोखिम में डालकर खेल नहीं खेला जा सकता है। इसके लिए स्वच्छ वातावरण की आव’यकता होती है। खिलाड़ियों के बिना खेल नहीं होता है। खेल में खिलाड़ी अहम् होता है। इसलिए उनकी सुरक्षा की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। उनके सुरक्षा का भरोसा कायम किया जाना चाहिए। हिंसा प्रभावित इलाको में खिलाड़ियों द्वारा खेलने से इनकार करने का तात्पर्य यह है कि कहीं न कहीं खेल संगठनो और आयोजको द्वारा खिलाड़ियों की सुरक्षा को गंभीरता से नही लिया जा रहा है। क्रिकेट हो या अन्य कोई खेल खिलाड़ियों की सुरक्षा को सर्वोपरी माना जाना चाहिए। खिलाड़ियों में सुरक्षा को लेकर भरोसा कायम करने की आव’यकता है। किसी प्रतियोगिता में खेलने के लिए खिलाड़ी को लंबे समय तक एक शहर अथवा दे’ा में रूकना पड़ता है। इसलिए सुरक्षा की गारंटी के बिना खेल खेला जाना संभव नहीं होता है। खिलाड़ियों के सुरक्षा के मुद्दंे पर बहस की आव’यकता है। यदि खेलो के माध्यम से आंतकीयों के हौसलो को पस्त करना है तो खिलाड़ियों की सुरक्षा चिंताओ को दूर किया जाना जरूरी है।
(लेखक स्पोटर््स स्पीड पत्रिका के मानद् संपादकीय सलाहकार है।)

मनीष कुमार  जोशी सीताराम गेट के सामने, बीकानेर 9413769053