खेलो के चितेरे

चित्रकार के बारे में कहा जाता है कि उसका कैनवास का दायरा बहुत विस्तृत होता है और  उस कैनवास पर समाज का प्रतिबिम्ब देखा जा सकता है। कलाकार समाज के प्रति संवेदनशील होता है और वह जो कुछ महसूस करता है उसे कैनवास पर उतार देता है। लेकिन आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि खेल भी एक कलाकार का विषय हो सकता है। खेलो पर चित्र की बाते यदा कदा सुनने का मिलती है । परन्तु खेलो पर चित्रकारी करने वाला एक अलग कलाकार वर्ग है और उनकील कलाकृतियों की दुनिया में बहुत बड़ी मांग है। वर्तमान समय में खेलो पर बनी कलाकृतियों का एक बहुत बड़ा बाजार है और दुनिया के अलग अलग कोने में कलाकार खेलो के रोमांच को कैनवास पर उतारने का कार्य बखूबी कर रहे है।

 खेलो के एक्’ान को कैनवास पर उतारने वाले कलाकार वैसे तो पूरी दुनिया में फेले हुए है परन्तु अमेरीका इसका केन्द्र है । यहां पर कई कलाकार खेलो पर चित्रकारी करने में वि’ोषज्ञता हासिल किए हुए है। खेलो पर चित्रकारी करने वाले कलाकारो को एक मंच प्रदान करने के लिए 1984 में अमेरीका में अमेरीकन स्पोर्टस आर्ट म्यूजियम एवं आर्चिव ( एएसएएमएं) की स्थापना की गई। यहां खेलो पर बनी कलाकृतियांे का संरक्षण किया जाता है । इसके मुख्यालय में एक आर्ट गैलेरी भी है जिसमें खेलो पर चित्रकारी करने वाले प्रसिद्ध चित्रकारो की कलाकृतियां प्रदर्’िात है। इस संस्था द्वारा प्रतिवर्ष साल के सर्वश्रेष्ठ खेल कलाकार को सम्मानित किया जाता है। 1984 से लगातार यह पुरस्कार दिया जा रहा है।  चीन के चित्रकार गु गान को 2008 का सर्वश्रेष्ठ खेल चित्रकार घोषित किया गया है।  गु गान खेलो पर परम्परागत और समकालीन चित्रकारी करते है। इस पुरस्कार के लिए दुनिया का कोई भी कलाकार जो खेलो पर कलाकृतियां बनाता है, आवेदन कर सकता है। यह पुरस्कार अब तक दुनिया के 24 कलाकारो को दिया जा चुका है।

 अमेरीका के एडगर ब्राउन दुनिया के वि’ोषज्ञ खेल चित्रकार है। ब्राउन केवल खेलो को ही कैनवास पर उतारते है। एथलीटो की अलंकारिक कलाकृतियों को कलाप्रेमियो द्वारा वि’ोष रूप से पसंद किया जाता है। बा्रउन स्वंय मार्’ाल आर्ट और कु’ती के खिलाड़ी रह चुके है। ब्राउन एथेलेटिक्स और रग्बी जैसे खेलो को कैनवास पर बखूबी उतारते है। ब्राउन की चर्चित कृतियों में कु’ती की ‘ द कार्डले ’ प्रसिद्ध मुक्केबाज मो. अली पर ‘द ग्रेटेस्ट’ और फुटबाल पर ‘सुपर बाउल’ प्रमुखस हे। इन कृतियों की कीमत 10,000 अमेरीकी डाॅलर से शुरू होती है। ब्राउन की तरह ही  मार्क ट्रब्सूकी भी एथलीटो के एक्’ान को कैनवास पर उतारते है।  मार्क की पेटिंग्स बहुत मंहगे दामो में बिकती है और इनके जरिये कमाइ्र्र गई रा’िा का एक बहुत बड़ा हिस्सा चैरिटी में लगाते है। फं्रास के चित्रकार पास्कल जीन डेलोरम को खेलो से बहुत लगाव है। वे मैदान में खेलते नहीं है परन्तु वे अपनी भावनाओ को कैनवास पर उतारते है। वे अपनी खेल कलाकृतियो की कई प्रदर्’िाया लगा चुके है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘विक्टोयर’,:विन्डसर्फ क्लोवर और ‘सैलिंग एण्ड मोय ’ है। इनकी कृतियो की कीमत 350 यूरो से 10,000 यूरो तक हे। फा्रंस में उनकी खेल कलाकृतियो की जबरदस्त मांग है।

 खेल जीवन में उर्जा भरते है और बेहतरीन खेल कृतियां मन को उर्जावान बनाती है। इसी कारण यूरोप और अमेरीकी दे’ाो में खेलो पर बनी कलाकृतियांे का पसंद किया जाता है। खेलो पर चित्रकारी करने वाले मिकी मेन्टले की बेसबाल पर बनाई गई एक कृति एक लाख दस हजार पौण्ड में निलाम हुई। खेल कृतियो में मुख्य पर से खिलाड़ियों के पोट्रेेट, एथलीटो के एक्’ान और समकालीन कृतियां पसंद की जाती है। कलाकार मुख्य रूप से एथलेटिक्स, रग्बी, गोल्फ और फुटबाल पर कृतियां बनाते है। ईग्लैण्ड के कुछ कलाकारो ने क्रिकेट पर भी कृतियां बनाई है। इग्लैण्ड के चित्रकार जाॅन हाॅकिन्स ने क्रिकेट पर एक सीरीज कैनवास पर उतारी है।  उनकी कृति ‘क्रिकेट सीन’ काफी चर्चित रही
 भारतीय चित्रकला में भी खेलो पर चित्रकारी के उदाहरण मिलते है परन्तु भारत में यह एक अलग वर्ग के रूप  में विकसित नहीं हुई है। जयपुर के युवा चित्रकार संजय वर्मा और बीकानेर के योगेन्द्र कुमार पुरोहित ने भी खेलो को कैनवास पर उतारने का प्रयास किया है। इसप्रकार एक चित्रकार की दृष्टि खेल मैदान तक भी पहुंचती है और वह अपनी कूंची से खेल के रोमांच को अमर कर देता है।

One Response to खेलो के चितेरे

  1. बेहतरीन जानकारी। आभार।

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